2021 की जनगणना में आदिवासी अपना धर्म हिंदू लिखाएं, इस मुहिम में जुटेगा संघ

भोपाल. नागरिकता संशोधन कानून के साथ-साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपने एजेंडे में 2021 में होने जा रही जनगणना को भी रखा है। संघ को ऐसी जानकारियां मिली हैं कि आदिवासियों के बीच कुछ ऐसे संगठन काम कर रहे हैं, जो जनगणना के समय उनसे हिंदू की जगह अन्य जाति व धर्म (अदर कास्ट रिलीजन) लिखवाना चाहते हैं।


ऐसे में हिंदू की संख्या घट जाएगी। भोपाल में चल रही समन्वय बैठक अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख अरुण कुमार (जम्मू कश्मीर के प्रांत प्रचारक रह चुके हैं) ने इस विषय की जानकारी दी। बैठक में बताया गया कि 1991 की जनगणना में हिंदुओं की संख्या 84% थी, जो 2011 में घटकर 69% हो गई। यह आदिवासियों खास तौर पर भील व गौंड के हिंदू की जगह अन्य धर्म लिखवाने के कारण हुआ।


संघ प्रमुख मोहन भागवत ने सभी स्वयंसेवक व संगठन आदिवासियों के बीच जाकर उन्हें तमाम परिस्थितियों की जानकारी दें और उन लोगों के बारे में बताएं जो भ्रम फैला रहे हैं। क्षेत्रीय समन्वय बैठक के आखिरी दिन दो सत्र हुए। पहले सत्र को अरुण कुमार और अंतिम सत्र को भागवत ने संबोधित किया। भागवत ने जिज्ञासा एवं समाधान सत्र में लोगों से उनके विचार जाने और उनके जवाब दिए।


जिज्ञासा और समाधान- संघ प्रमुख ने दिए लोगों के सवालों के जवाब


सवाल- एफडीआई को लेकर संघ का क्या विचार है?
भागवत : यह सोचना या इस पर बोलना हमारा काम नहीं, लेकिन यह स्पष्ट है कि सरकारें किसी की नहीं होतीं, जो भी सही है उसका समर्थन करें और गलत का विरोध। 


सवाल- संघ ने इतना काम किया, लेकिन जो बदलाव होना था अभी क्यों नहीं हुआ? (राष्ट्र सेविका संगठन की महिला का सवाल)
भागवत : आप ही बता दें कि अब तक आपने कितना काम किया? सिर्फ संगठन में राज्य स्तरीय या अखिल भारतीय पद हासिल करने से कुछ नहीं होता, स्वयंसेवक बनकर काम करना और समाज में स्थान बनाना पड़ता है। 


सवाल- स्वयंसेवक को अब किस तरह समाज में जाना चाहिए? आचार-व्यवहार तो नहीं बदलना होगा?
भागवत
: खंड स्तर पर यदि आपको लोग नहीं पहचानते और अपने सामाजिक विवादों के बारे में राय नहीं लेते तो यह विचार आपको करना है कि आप किस तरह काम कर रहे हैं। सामाजिक प्रतिष्ठा कितनी है। हमारा काम समरसता के साथ समाज का निर्माण करना है। इसलिए हर वर्ग के साथ न केवल संवाद करना होगा, बल्कि परिवार बैठकों में जाना होगा।


विचारों से कैसे जोड़ें?
भागवत :
संघ के कामकाज को लोग और भारतीय समाज अब समझने लगा है। आगे होकर सहयोग करना चाहता है। अब अपने विचारों को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं। इसी से एक आदर्श भारतीय समाज का निर्माण होगा।



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