एलआईसी: जीवन बीमा में 70% हिस्सा, 36 लाख करोड़ रु. की संपत्ति, देश की सबसे बड़ी कंपनी बनने की ओर

मुंबई. 63 साल पुरानी कंपनी- लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन अब देश की सबसे बड़ी कंपनी बनने की ओर अग्रसर है। 1956 में 245 इंश्योरेंस कंपनियों और प्रोविडेंड सोसायटियों के मर्जर से खड़ी की गई एलआईसी का आईपीओ आने वाला है। बजट भाषण में किए गए इस ऐलान को लेकर कई आशंकाएं भी बनी हुई हैं। विपक्ष इसका विरोध कर रहा है, वहीं कर्मचारी संगठनाें ने भी इस फैसले का विरोध किया है।  उधर, विशेषज्ञों का मानना है कि इस ऐलान से एलआईसी को फायदा ही होगा। एलआईसी मार्केट कैप के लिहाज से देश की सबसे बड़ी कंपनी बनने की ओर बढ़ रही है। अभी देश में मार्केट कैप के लिहाज से रिलायंस इंडस्ट्री सबसे ऊपर है।


भारतीयों के लिए सबसे भरोसेमंद
एलआईसी, दशकों से भारतीयों के लिए सबसे सुरक्षित और सबसे भरोसेमंद कंपनी साबित हुई है। सितंबर, 2019 की स्थिति के अनुसार एलआईसी की कुल आय 17.79 फीसदी बढ़कर 2 लाख 97 हजार करोड़ रुपए रही। एक साल पहले इसी अवधि में 2 लाख 52 हजार करोड़ रुपए थी। एलआईसी में सब कुछ अच्छा ही चल रहा है, ऐसा भी नहीं है। एलआईसी का एनपीए (नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स) दोगुने स्तर पर पहुंच गया है। एलआईसी की वेबसाइट पर जारी सालाना रिपोर्ट के मुताबिक मार्च 2019 तक एनपीए का ये आंकड़ा निवेश के अनुपात में 6.15 फीसदी के स्तर तक पहुंच गया है, जबकि 2014-15 में एनपीए 3.30 प्रतिशत के स्तर पर था। यानी पिछले पांच वित्तीय वर्षों के दौरान एलआईसी के एनपीए में तकरीबन 100 फीसदी का उछाल आया है। 2018-19 की सालाना रिपोर्ट के अनुसार-  31 मार्च 2019 तक कंपनी का सकल एनपीए 24 हजार 777 करोड़ रुपए था। जबकि कंपनी पर कुल देनदारी यानी कर्ज चार लाख करोड़ रुपए से अधिक का था। एलआईसी की कुल परिसंपत्तियां 36 लाख करोड़ रुपए की हैं। सरकार एलआईसी का आईपीओ क्यों लाना चाहती है? असर क्या होगा? जानिए एक्सपर्ट से।


देश के सबसे बड़े संभावित आईपीओ से जुड़ा वो सब जो आपको जानना चाहिए



  • क्या : सरकार आईपीओ के जरिए एलआईसी में हिस्सेदारी बेच रही है

  • क्यों : 2.1 लाख करोड़ विनिवेश का लक्ष्य, 80 हजार करोड़ यहीं से

  • फायदा : मार्केट कैप में रिलायंस को पीछे छोड़ सकती है एलआईसी


एलआईसी कितनी बड़ी. एक साल में 10% से ज्यादा बढ़ी संपत्ति









































एलआईसी    2019    2018    वृद्धि (%)
कुल परिसंपत्तियां (करोड़ रु.)    36,65,743    33,13,049    10.65
नियोजित पूंजी (करोड़ रु.)    37,116    36,582    1.46
शाखा कार्यालय     11,280    11,111    1.52
एजेंट    21,94,747    20,82,668    5.38
कर्मचारी    2,85,019    2,65,727    7.26

एलआईसी बीमा बाजार में लीडर कंपनी है। 2018-2019 में कंपनी ने 2.14 करोड़ नई पॉलिसी बेची। एलआईसी की बाजार में 78 फीसदी हिस्सेदारी है। ( स्रोत: एलआईसी की वेबसाइट)
 


मार्केट कैप के लिहाज से अभी देश की टॉप 3 कंपनी :





















कंपनी    मार्केट कैप
रिलायंस  908,888.02
टीसीएस   801,772.04
एचडीएफसी बैंक   680,391.85

                                                           - आंकड़े करोड़ रुपए में (स्रोत: बीएसई की वेबसाइट)


 विशेषज्ञों का मानना है कि आईपीओ के बाद एलआईसी मार्केट कैप के लिहाज से देश की सबसे बड़ी कंपनी बन सकती है। अभी यह ओहदा रिलायंस के पास है।


एक्सपर्ट



  • गौरव खन्ना, वाइस प्रेसिडेंट रिसर्च, इक्वीनॉमिक्स      

  • देवन चौकसे, एमडी, केआर चौकसे सिक्योरिटीज

  • अरुण केजरीवाल, स्टाॅक मार्केट एनालिस्ट


1. इस पूरी कवायद से सरकार को क्या मिलेगा?


आईपीओ के माध्यम से एलआईसी की हिस्सेदारी बेचने पर सरकार को उसकी इक्विटी बेचने का मौका िमलेगा। इससे 70 से 80 हजार करोड़ रुपए की राशि प्राप्त होगी। दूसरा बड़ा फायदा एलआईसी के लिस्टेड होने से उसमें मैनेजमेंट की ट्रांसपेरेंसी के रूप में होगा। तीसरा बड़ा फायदा मार्केट कैपेटलाइजेशन को बढ़ाने के रूप में मिलेगा। एलआईसी के लिस्टेड होने से 7 से 8 लाख करोड़ रुपए मार्केट में आने का अनुमान है।


2. क्या इससे ग्राहकों पर कोई असर होगा?
पॉलिसी होल्डर्स इससे अप्रभावित रहेंगे। क्योंकि पाॅलिसी होल्डर्स का रिजर्व अलग से गिना जाता है। जो भी प्रीमियम जमा किया जाता है उसे दो तरह से उपयोग में लाया जाता है। पहला भाग इन्वेस्टमेंट में जाता है और दूसरा मॉर्टेलिटी के हिसाब से क्लेम का जो पेमेंट आता है उसमें जाता है। उल्टे एलआईसी का मार्केट साइज बढ़ने से लोगों को इन्वेस्ट करने के और मौके मिलेंगे।


3.  इस बिक्री का असर क्या होगा?
 


पॉलिसी पर...
एलआईसी की पॉलिसीज पर कोई नकारात्मक असर नहीं होगा। वरन् किसी कंपनी की जब फाइनेंशियल स्ट्रेंथ बढ़ जाती है तो उसके प्रॉडक्ट की कीमत और बढ़ जाती है। यह नियम यहां पर भी लागू होगा एलआईसी की पॉलिसीज की कीमत और बढ़ेगी।


ग्राहकों पर...


यदि आयकर छूट के लिए मिलने वाले सारे लाभ बंद कर दिए जाते हैं तो फिर एलआईसी पॉलिसीज को लेकर लोगों में रुचि घट सकती है, जिसका एलआईसी की बिक्री पर गहरा असर पड़ सकता है।


एलआईसी पर...


एलआईसी पूरी तरह सुरक्षित रहेगी। हालांकि यदि लोगों को 80 सी के तहत मिलने वाली छूट पूरी तरह समाप्त कर दी जाती है तो समस्या हो सकती है। वहीं कंपनी के लिस्टेड हाेने के साथ ही अकाउंटेबिलिटी, ट्रांस्पेरेंसी बढ़ेगी। रिकॉग्नीशन अच्छा मिलेगा जिससे नए इन्वेस्टर्स को लाने में अच्छी सुविधा होगी।


एजेंट्स पर...


एलआईसी के लगभग 12 लाख एजेंट्स हैं। इस बिक्री का उन पर कोई इफेक्ट नहीं पड़ेगा। बल्कि एजेंट्स को इन्वेस्टर बनने का मौका मिल सकता है। अगर ऐसा होता है तो उनमें ओनरशिप कमिटमेंट बढ़ेगा। एजेंट्स का कंपनी पर विश्वास और बढ़ेगा।

4. एलआईसी की हिस्सेदारी सरकार क्यों बेच रही है?


सरकार ने अगले वित्तीय वर्ष तक 2.1 लाख करोड़ रुपए के विनिवेश का लक्ष्य तय किया है। एलआईसी इस लक्ष्य को लगभग 50 प्रतिशत पूरा कर सकती है। वित्तीय वर्ष 2019-20 में सरकार ने विनिवेश से 65,000 करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य तय किया है। वहीं दूसरी तरफ जानकारों का मानना है कि जब कोई कंपनी प्रॉफिट में चल रही हो तभी इसकी हिस्सेदारी बेचनी चाहिए।  इसका बड़ा बेनीफिट कंपनी को प्राॅफिट करने और ग्रो करने की क्षमता बढ़ाने के रूप में मिलता है। इन्वेस्टर भी नया फंड कंपनी के अंदर ग्राे करने के लिए लाता है।


5. क्या लोगों का विश्वास एलआईसी पर कम होगा? 


30 सितंबर 2019 तक एलआईसी के कॉर्पोरेट सेग्मेंट में लगभग 6 प्रतिशत का एनपीए था। डेक्कन क्रॉनिकल, जीटीएल, एस्सार शिपिंग, गैमन, आईएल एंड एफएस, भूषण पॉवर, एबीजी जैसी शिपयार्ड कंपनियो से इसे भारी जोखिम मिला। इसके पहले एलआईसी में इस सेग्मेंट के तहत एनपीए 1-1.5 तक ही रहा है। एलआईसी के लिस्टेड होेने का बड़ा फायदा इसे ट्रांसपेरेंसी के रूप में मिलेगा।


6. क्या यह आईपीओ लाने का सही समय है?
सरकार का लक्ष्य 5 ट्रिलियन इकोनॉमी का है। इसके लिए जरूरी है कि देश कि जो बड़ी संस्थाएं हैं वे लिस्टेड हों। इनके लिस्टेड होने से ही यह रिफलेक्शन जाएगा कि भारत कितनी बड़ी इकोनॉमी है। इस लिहाज से यह बिल्कुल सही समय है।


7. जब-जब सरकारी कंपनियां शेयर मार्केट में लिस्टेड हुईं, तब उनका प्रदर्शन कैसा रहा?
पूर्व में केंद्र सरकार ने उसके शतप्रतिशत अधिकार वाली दो इंश्योरेंस कंपनियों को आंशिक रूप से लिस्टेड किया था। इनमें न्यू इंडिया इंश्योरेंस और जीआईसी-री शामिल हैं, लेकिन सरकार के लिए ये अनुभव अच्छे नहीं रहे। यदि प्राइवेट सेक्टर के इंश्योरेंस जैसे आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल, एचडीएफसी से तुलना करें तो यह काफी पीछे रह गया। वहीं हाल ही में आईआरसीटीसी को लिस्टेड किया गया तो इसके शेयरों के दाम पांच गुना तक बढ़ गए।